Series: Dosti ki darmiyan,,,,,
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Dosti ki darmiyan,,,,,
पढ़ा गया : 25पढ़ने का समय : 5 मिनटSiya ka College me pahla din
सिया कॉलेज में पहले दिन अपने नए सफर की शुरुआत करने आई थी। उसके दिल में एक्साइटमेंट और थोड़ी घबराहट दोनों ही थीं। उसने अपना बैग कंधे पर लटकाया और कॉलेज के गेट पर पहुँच गई। चारों ओर की चहल-पहल से उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। उसे अपने गले में लिपटी साड़ी और साधारण सी ब्लाउज में देखकर, कोई नहीं सोच सकता था कि वह एक अमीर परिवार से है।
सिया ने बड़े ही संकोच के साथ कॉलेज के छात्रों को देखा। यहां सब एक दूसरे के साथ बातचीत कर रहे थे, हंस रहे थे, और कॉलेज के पहले दिन की खुशियों का आनंद ले रहे थे।
सिया ने ठान लिया था कि वह अपनी असली पहचान को किसी के सामने नहीं लाएगी। अमीर होने का दिखावा उसके लिए कभी भी महत्वपूर्ण नहीं था, लेकिन वह चाहती थी कि लोग उसे उसकी असली योग्यताओं के आधार पर जानें, न कि उसके धन के कारण।
सिया ने एक कोने में खड़े होकर अपनी किताबों की शक्ल पर ध्यान दिया। उसकी आंखों में एक अद्वितीय चमक थी, जो उसके आत्मविश्वास को बयां करती थी, लेकिन उसने अपने चेहरे पर एक साधारण सा चेहरा धारण कर लिया था। धीरे-धीरे, वह कॉलेज के वातावरण में अपने आप को ढालने की कोशिश करने लगी।
सिया ने धीरे-धीरे अपने नए कॉलेज के माहौल में कदम रखा। उसके चारों ओर छात्र-छात्राएं थे, जो एक नई दुनिया में अपने सपनों का पीछा कर रहे थे। वह एक कोने में खड़े होकर अपनी किताबों की शक्ल पर ध्यान दे रही थी। उसकी आंखों में एक अद्वितीय चमक थी, जो उसके आत्मविश्वास को बयां कर रही थी। वह अपनी किताबों में खोई हुई थी, मानो किसी रोमांचक कहानी में डूब गई हो। हालांकि, उसके चेहरे पर एक साधारण सा चेहरा था, जो उसकी गंभीरता और अध्ययन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शा रहा था।
सिया की सोच में एक अद्वितीयता थी। वह जानती थी कि कॉलेज जीवन एक नया सफर है, जो न केवल पढ़ाई, बल्कि नए दोस्त बनाने और खुद को खोजने का भी अवसर है। धीरे-धीरे, वह अपने चारों ओर के माहौल में खुद को ढालने की कोशिश करने लगी। वह कभी-कभी सोचती थी कि क्या उसे अपने पुराने स्कूल के दोस्तों की याद आएगी, लेकिन उसने मन में ठान लिया था कि उसे नए अनुभवों का सामना करना है।इसी दौरान, एक बास्केटबॉल का खेल चल रहा था। सिद्धार्थ, जो कॉलेज का सबसे लोकप्रिय छात्र था, बास्केटबॉल कोर्ट पर अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। उसका खेल देखना सच में मनोरंजन था। उसने अपनी टीम के लिए जबरदस्त ऊर्जावान खेल दिखाया था। लेकिन तभी उसकी नज़र उधर गई, जहां सिया एक साइड में बैठी किताब पढ़ रही थी। पहली बार उसे किसी लड़की के प्रति इतनी गहन रुचि महसूस हुई।
सिद्धार्थ ने उसे ध्यान से देखा। उसकी किताबों में डूबी हुई अवस्था ने सिद्धार्थ को आकृष्ट किया। उसके चेहरे की सज्जनता और आत्मविश्वास ने उसे अंदर से छू लिया।
उसे लगा जैसे समय थम गया हो। उसने खेल में अपनी पूरी ऊर्जा लगाई, लेकिन उसकी आंखें सिया पर स्थिर रहीं। वह सोचने लगा कि क्या वास्तव में सिया सिर्फ एक साधारण छात्रा थी या उसके अंदर कोई अद्वितीय प्रतिभा छिपी हुई थी जो उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा देती थी।
खेल खत्म होने के बाद भी सिद्धार्थ का मन नहीं भरा। उसने टीम के खिलाड़ियों को तेजी से जीत दिलाने के लिए सराहा, लेकिन उसकी नजरें बार-बार सिया की ओर लौटती रहीं। जब बाकी छात्र-छात्राएं बास्केटबॉल कोर्ट से बाहर निकल रहे थे, सिद्धार्थ ने निर्णय लिया कि वह सिया से बातचीत करेगा।
वह धीरे-धीरे उसके पास गया। “क्या मैं तुम्हारे पास बैठ सकता हूं?” सिद्धार्थ ने खुद को संयत रखते हुए पूछा। सिया ने अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेरते हुए सिर हिलाया।
“अरे, मैं आपको देख रहा था। आप अकेली बैठी थीं, सोचा आपके पास आ जाऊँ।” सिद्धार्थ ने कहा। उसकी बातों में एक उत्साह और ईमानदारी थी।
“हाँ, मैं कॉलेज में नई हूँ,” सिया मुस्कुराते हुए जवाब देती है।
“ओह, तो ये बात है,” सिद्धार्थ ने कहा। “आप बास्केटबॉल खेलती हैं?”सिया ने थोड़ा संकोच करते हुए कहा, “नहीं, मैं तो सिर्फ देखती हूँ। लेकिन मैंने आपको खेलते हुए थोड़ा देखा था। आप बहुत अच्छे खेल रहे थे।”
“धन्यवाद! मैं सिद्धार्थ हूँ,” उसने आत्मविश्वास से कहा। “आपका नाम क्या है?”
“मैं सिया हूँ,” उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
सिद्धार्थ ने सोचा कि ये मौका अच्छा है, उसने सीधा पूछ लिया, “क्या हम दोस्त बन सकते हैं?”सिया ने हैरानी से उसकी ओर देखा और थोड़ी चिढ़ाते हुए कहा, “क्या गर्लफ्रेंड बनाने के लिए ये दोस्ती की पेशकश है?”
सिद्धार्थ को मज़ा आ गया, उसने हंसते हुए कहा, “अरे नहीं, अगर मुझे गर्लफ्रेंड बनानी होती, तो मैं सीधा दोस्ती का थोड़ी पूछता, एक सुंदर सा फूल लेकर परपोज़ नहीं कर देता।”
सिया की आँखों में चमक आ गई। “तो क्या आप रोज पार्क में ऐसे ही आएंगे मेरे पास?”“अगर आप मना नहीं करेंगी तो हर रोज़। मैं तो बास्केटबॉल खेलने के बहाने यहाँ आता हूँ, लेकिन आपसे बातें करना ज्यादा मजेदार है,” सिद्धार्थ ने हल्के से कहा।
“ओह, ठीक है,” सिया बोली। “तो अभी क्या करेंगे?”
“क्या आपको वो हर बार छोटे-छोटे जोक्स सुनाने का शौक है?” सिद्धार्थ ने मजाक में पूछा।सिया ने हंसते हुए कहा, ” हाँ, लेकिन वो जोक्स तो बहुत ही बेसुरे हैं।”
“तो मैं यहाँ कुछ बेसुरे जोक्स लेकर आया हूँ। सुनो: तुम जानती हो, गधा क्यूँ गाता है?” सिद्धार्थ ने जोक शुरू किया।
“क्यों?” सिया ने चिढ़ाते हुए पूछा।“क्योंकि उसके पास सिंगिंग क्लास नहीं होती!” Siddharth ने हंसते हुए कहा।
सिया भी हंसते हुए बोली, “ये तो वाकई में बेसुरा था! और क्या है तुम्हारे पास?”
“ठीक है एक और सुनो: जानवरों के स्कूल में क्या होता है?” सिद्धार्थ ने और एक जोक पूछ लिया।
“क्या?” सिया ने उत्सुकता से कहा।“यहाँ सब्जियाँ पढ़ाई जाती हैं, और फल खेलते हैं!” सिद्धार्थ ने फिर से ठहाका लगाने वाली हल्की हंसी सक्षम की।
सिया हंसते-हंसते लोटपोट हो गई, “तुम तो बहुत मजेदार हो। लग रहा है दोस्ती का ये सफर मजेदार होने वाला है।”सिद्धार्थ ने उसकी ज़िंदगी में थोड़ी खुशी बिखेर दी थी। वो दोनों धूप में बैठे-बातें करते रहे, और अगले कुछ दिनों में उनकी दोस्ती और भी गहरी होती गई। हर दिन सिद्धार्थ और सिया पार्क में मिलते, और अलग-अलग जोक्स पर ठहाके मारते।
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Lakshmi Kumari
NSW अनुभवी लेखक -🥇
