इस कदर मेरी दोस्ती का…
.इम्तेहान तो मत लिजीये… .
खफा हो क्यों… .
*ये तो बता दीजिये… .*
माफ कर दो अगर… .
हो गई हो हमसे कोई भूल… .
पर ऎसे याद ना कर के… .
*हमे सजा तो मत दीजिये!!*
दिल से निकली हुई जज़्बात ज़िन्दगी में शायरी बनती है।
इस कदर मेरी दोस्ती का…
.इम्तेहान तो मत लिजीये… .
खफा हो क्यों… .
*ये तो बता दीजिये… .*
माफ कर दो अगर… .
हो गई हो हमसे कोई भूल… .
पर ऎसे याद ना कर के… .
*हमे सजा तो मत दीजिये!!*
रात में तुम ख्वाब नहीं,
*नशा बनकर उतरती हो,*
छुए बिना ही तुम मेरी
*रूह तक बिखरती हो…!!🌹*
❤️🌷
तू हक़ जताया कर, अच्छा लगता है,
यूँ अपना सा बताया कर, अच्छा लगता है।
दुनिया भर की मोहब्बत नहीं चाहिए मुझे,
बस कभी-कभी मुझे अपना कहा कर,
अच्छा लगता है। 🌷🍀❤️
मैंने इश्क़ को
लिखना चाहा था अल्फ़ाज़ों में,
पर हर दफ़ा
काग़ज़ पर बस तेरा नाम उतर आया…💘
करते हो इश्क़ भरी शायरी,
चलो हम भी इश्क़ भरी शायरी कर लें।
आँखों से आँखें, निगाहों से निगाहें चार कर लें।
ये दुनिया नहीं समझेगी हमारे दरमियाँ की बातें,
क्यों न आज फिर से प्यार भरी बातें चार कर लें।
जिसे चाहा था अपनी जान से भी ज़्यादा,
वही आज अनजान सा लगता है,
जिसके बिना एक पल भी मुश्किल था,
आज उसके बिना जीना आसान सा लगता है।

हमने तो मोहब्बत में अपना सब कुछ हार दिया,
उसने बस मुस्कुराकर हमें किनारे कर दिया,
जिसे समझा था अपनी ज़िंदगी की आख़िरी मंज़िल,
उसने हमें रास्ते में ही छोड़ दिया।

तेरे बाद किसी से दिल लगाने की हिम्मत नहीं हुई,
टूटे हुए दिल को फिर सजाने की हिम्मत नहीं हुई,
तूने तो पल भर में भुला दिया हमें,
और हमें तुझे भुलाने में पूरी उम्र लग गई।

पढ़ने का समय : < 1 मिनट
दर्द इतना है कि आँखें भी नम नहीं होतीं,
यादें इतनी हैं कि रातें कम नहीं होतीं,
तुमसे बिछड़कर समझ आया ये इश्क़,
हर किसी के नसीब में मोहब्बत पूरी नहीं होती।