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श्रेणी: डरावनी कहानी

  • भूतिया रास्ता

    भूतिया रास्ता

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    भूतिया रास्ता

     

    राजस्थान के एक छोटे से गाँव के बाहर एक पुराना रास्ता था। लोग उसे “भूतिया रास्ता” कहते थे। वह रास्ता घने पेड़ों के बीच से होकर गुजरता था। दिन में भी वहाँ अजीब-सी खामोशी रहती और शाम ढलते ही कोई उस तरफ जाने की हिम्मत नहीं करता।

     

    गाँव के बुजुर्ग हमेशा कहते थे, “इस रास्ते से रोज़ सिर्फ एक इंसान गुजरता है… और उसी दिन एक भूत अपना नया शिकार चुन लेता है।”

     

    पहले तो लोगों को यह सिर्फ एक कहानी लगती थी, लेकिन पिछले कई सालों से हर महीने कोई न कोई इंसान उस रास्ते से गुजरने के बाद गायब हो जाता था। उसकी लाश भी कभी नहीं मिलती थी।

     

    गाँव का एक लड़का था रोहित। वह शहर में पढ़ाई करता था। उसे भूत-प्रेत जैसी बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था। छुट्टियों में जब वह गाँव लौटा तो उसने भी लोगों से इस रास्ते की कहानी सुनी।

     

    रोहित हँसते हुए बोला, “अगर सच में वहाँ भूत है तो मैं आज रात उसी रास्ते से होकर जाऊँगा। देखता हूँ कौन मेरा क्या बिगाड़ लेता है।”

     

    उसकी माँ डर गई।

     

    “बेटा, जिद मत कर। तेरे ताऊ भी इसी रास्ते से गए थे… फिर कभी वापस नहीं आए।”

     

    लेकिन रोहित ने किसी की बात नहीं मानी।

     

    रात के करीब नौ बजे उसने टॉर्च उठाई और अकेला ही उस रास्ते की ओर चल पड़ा।

     

    जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रहा था, हवा ठंडी होती जा रही थी। अचानक उसकी टॉर्च कई बार अपने-आप जलने-बुझने लगी।

     

    “बैटरी खत्म हो रही होगी,” उसने खुद को समझाया।

     

    तभी पीछे से किसी के कदमों की आवाज़ आई।

     

    टक… टक… टक…

     

    रोहित तुरंत पीछे मुड़ा।

     

    लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

     

    वह दोबारा चलने लगा। इस बार उसे साफ महसूस हुआ कि कोई उसके बिल्कुल पीछे चल रहा है।

     

    उसने तेज़ी से कदम बढ़ाए।

     

    अचानक उसके सामने सफेद कपड़ों में एक बूढ़ी औरत दिखाई दी।

     

    उसके लंबे सफेद बाल चेहरे पर फैले हुए थे।

     

    “बेटा… मुझे मेरे घर तक छोड़ देगा?” उसने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा।

     

    रोहित ने राहत की साँस ली।

     

    “अरे, मैं तो डर ही गया था। आइए दादी, कहाँ जाना है?”

     

    औरत मुस्कुराई।

     

    लेकिन उसकी मुस्कान इंसानों जैसी नहीं थी।

     

    उसके दाँत बेहद लंबे और काले थे।

     

    रोहित घबरा गया।

     

    वह पीछे हटने लगा।

     

    इतने में वह औरत पल भर में उसकी आँखों के सामने से गायब हो गई।

     

    “ये… ये कैसे हो सकता है?”

     

    रोहित का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।

     

    वह भागने लगा।

     

    लेकिन जितना भागता, रास्ता उतना ही लंबा होता जाता।

     

    कुछ दूर जाकर उसे लगा कि वह फिर उसी जगह आ गया है जहाँ से चला था।

     

    अब उसे समझ आ गया था कि कुछ बहुत गलत हो रहा है।

     

    तभी पेड़ों के ऊपर से किसी के हँसने की आवाज़ आई।

     

    “हा… हा… हा…”

     

    रोहित ने ऊपर देखा।

     

    एक भयानक चेहरा पेड़ की डाल पर उल्टा लटका हुआ था।

     

    उसकी आँखें पूरी काली थीं और चेहरा जला हुआ था।

     

    रोहित चीख पड़ा।

     

    वह फिर भागा।

     

    इस बार उसके सामने एक छोटा बच्चा दिखाई दिया।

     

    बच्चा रो रहा था।

     

    “भैया… मेरी माँ खो गई है…”

     

    रोहित उसके पास जाने लगा।

     

    अचानक बच्चे ने सिर उठाया।

     

    उसकी आँखें नहीं थीं… सिर्फ काले गड्ढे थे।

     

    उसका मुँह धीरे-धीरे इतना बड़ा हो गया कि पूरा चेहरा उसी में बदल गया।

     

    रोहित पीछे गिर पड़ा।

     

    उसी समय किसी ने उसका पैर पकड़ लिया।

     

    उसने नीचे देखा।

     

    मिट्टी के अंदर से दर्जनों हाथ निकलकर उसके पैरों को पकड़ रहे थे।

     

    रोहित पूरी ताकत से खुद को छुड़ाने लगा।

    किसी तरह उसने पैर छुड़ाया और भाग निकला।

    अब उसकी साँसें फूल चुकी थीं।

    तभी उसे दूर एक मंदिर दिखाई दिया।

    “बस… वहाँ पहुँच गया तो बच जाऊँगा।”

    वह पूरी ताकत से मंदिर की ओर दौड़ा।

    लेकिन जैसे ही पास पहुँचा, मंदिर अचानक गायब हो गया।

    उसकी जगह एक टूटा हुआ कुआँ था।

    रोहित समय रहते रुक गया, नहीं तो सीधे कुएँ में गिर जाता।

    तभी पीछे से किसी ने उसके कान के पास फुसफुसाया”आज का शिकार… मिल गया…”

    रोहित ने पीछे देखा।

    वहीं वही बूढ़ी औरत खड़ी थी।

    लेकिन अब उसका पूरा शरीर हवा में तैर रहा था।

    उसके पैर उल्टे थे।

    आँखों से खून बह रहा था।

    और उसके पीछे दर्जनों डरावनी परछाइयाँ खड़ी थीं।

    रोहित डर के मारे काँपने लगा।

    वह हाथ जोड़कर बोला, “मुझे छोड़ दो… मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?”

    बूढ़ी औरत बोली,

    “मैं अकेली नहीं हूँ… इस रास्ते पर मारे गए सभी लोग अब मेरे साथ हैं। हर दिन हममें से किसी एक को नई आत्मा चाहिए… तभी हमारा श्राप अधूरा नहीं रहता।”

    रोहित रोने लगा।

    “मैं वापस चला जाऊँगा… कभी नहीं आऊँगा।”

    लेकिन भूत हँसने लगे।

    धीरे-धीरे चारों तरफ धुंध फैल गई।

    सभी परछाइयाँ उसकी ओर बढ़ने लगीं।

    रोहित भागना चाहता था।

    लेकिन उसके पैर जैसे जमीन में जम गए।

    एक-एक करके सभी भूत उसके चारों तरफ खड़े हो गए।

    उनकी आँखें सिर्फ उसी को देख रही थीं।

    फिर अचानक सबने एक साथ उसका नाम पुकारा 

    “रोहित…”

    उसकी चीख पूरे जंगल में गूँज उठी।

    अगली सुबह गाँव वालों ने देखा कि रास्ते के बीच रोहित की टॉर्च और उसके जूते पड़े थे।

    लेकिन रोहित कहीं नहीं मिला।

    उस दिन के बाद गाँव में किसी ने उस रास्ते की तरफ जाना छोड़ दिया।

    समय बीतता गया।

    कई साल बाद शहर से एक सरकारी अधिकारी उस इलाके में नई सड़क बनाने पहुँचा।

    गाँव वालों ने उसे बहुत समझाया।

    “साहब… उधर मत जाइए।”

    लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी।

    वह शाम होते-होते उसी रास्ते पर पहुँच गया।

    रास्ते के बीच उसे एक युवक खड़ा दिखाई दिया।

    उसने कहा,

    “भाई साहब… क्या आप मुझे गाँव तक छोड़ देंगे? मैं रास्ता भूल गया हूँ।”

    अधिकारी ने मुस्कुराकर कहा,

    “हाँ, आ जाओ।”

    जैसे ही वह युवक उसकी गाड़ी में बैठा, अधिकारी ने शीशे में उसकी परछाईं देखी।

    पीछे कोई नहीं था।

    घबराकर उसने तुरंत मुड़कर देखा।सीट खाली थी।

    उसी समय पीछे से वही आवाज़ आई”आज का शिकार… मिल गया…”

    अगले दिन वह अधिकारी भी रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया।

    आज भी उस गाँव के लोग कहते हैं कि सूरज ढलने के बाद उस रास्ते से कभी मत गुजरना।

    क्योंकि वहाँ रहने वाला भूत आज भी हर दिन सिर्फ एक इंसान का इंतज़ार करता है… और जो उसकी नज़र में आ गया, वह फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौटता।

  • हवेली की भूतनी

    हवेली की भूतनी

    पढ़ने का समय : 8 मिनट

     

    डर की दस्तक

    गाँव का नाम था सहरपुर, जो अपनी शांति और सुंदरता के लिए जाना जाता था। यह गाँव चारों ओर हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा हुआ था। यहाँ के लोग मेहनती और मिलनसार थे। लेकिन, गाँव के बाहर एक पुरानी खंडहर वाली हवेली थी, जिसे कोई भी पास नहीं जाता था। लोग कहते थे कि यह हवेली भूतिया है। वहाँ रात में अजीबो-गरीब आवाजें सुनाई देती थीं।

    गाँव के बच्चों को इस हवेली के बारे में कई डरावनी कहानियाँ सुनाई गई थीं। कहा जाता था कि हवेली में एक महिला रहती थी, जिसकी आत्मा उस जगह पर रोड़ी थी। कुछ साल पहले, गाँव के एक युवक ने बहादुरी दिखाई और हवेली में दाखिल हो गया। लेकिन, वह कभी वापस नहीं लौटा। इस घटना ने गाँव में एक अजीब सा खौफ फैला दिया।

    इस हवेली के बारे में सुनकर गाँव के सबसे साहसी लड़के, अर्जुन ने उसका सामना करना तय किया। वह हमेशा से साहसी और निडर था, और अपने दोस्तों के बीच उसे सबसे बड़ा बहादुर माना जाता था। उसने अपने दोस्तों राधिका, संजय, और मीना को अपने साथ चलने के लिए मनाया।

    “चलो, हम सब मिलकर उस हवेली का सच जानते हैं,” अर्जुन ने कहा। उसके दोस्तों ने थोड़ी चिंता जताई, लेकिन अंततः उन्होंने अर्जुन के जोश में आकर उसके साथ जाने का फैसला किया।

    एक शाम, जब सूरज ढल रहा था, चारों दोस्त हवेली की ओर बढ़ने लगे। हवेली की दीवारें घास और काई से ढकी हुई थीं, और वहाँ की खिड़कियाँ टूट चुकी थीं। जैसे ही वे हवेली के दरवाजे तक पहुँचे, एक ठंडी हवा का झोंका आया, जिससे सबके मन में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई।

    “क्या तुम सब डर गए हो?” अर्जुन ने हंसते हुए कहा।

    “नहीं!” सबने एक साथ कहा, हालाँकि उनकी आवाज़ में थोड़ी थरथराहट थी।

    उन्होंने दरवाजा धीरे से खोला, और अंधेरे में कदम रखा। कमरे में धूल और जाले का गुड़ बन चुका था। उन्हें अंधेरे में चलने में थोड़ी मुश्किल हो रही थी। अर्जुन ने अपनी टॉर्च जलाकर चारों ओर देखा। कमरे के हर कोने में पुरानी किताबें पड़ी थीं, और दीवारों पर अजीब चित्र बने हुए थे।

    “क्या तुमने ये चित्र देखे?” मीना ने कहा। “ये बहुत ही डरावने हैं।”

    “चिंता मत करो। यहाँ कुछ नहीं है,” अर्जुन ने हिम्मत बंधाई।

    इसी बीच, अचानक एक चीख सुनाई दी। सब चौंके और देखे की राधिका अलमारी के पास खड़ी थी। “क्या वो… वो वहाँ कोई है?” उसने कहा, उसकी आँखों में भय की चमक थी।

    अर्जुन ने टॉर्च को उस दिशा में घुमाया, लेकिन वहाँ कुछ नहीं था। सबने राहत की साँस ली, लेकिन राधिका अभी भी डर रही थी। उन्होंने फैसला किया कि उन्हें हवेली के ऊपर वाले कमरे में जाना चाहिए, जहाँ सबसे पहले युवक गायब हुआ था।

    वे धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़े। सीढ़ियों पर धूल भरी और दरवाजों की पीली होती लकड़ी उनके कदमों के नीचे चरमराती गई। जैसे ही वे कमरे के दरवाजे के पास पहुँचे, अर्जुन ने दरवाजा खोला।

    कमरा अंधेरे में डूबा हुआ था। अर्जुन ने टॉर्च जलाया और सबने देखा कि कमरे के बीच में एक पुराना बिस्तर था। बिस्तर पर एक पुराना कंबल रखा था। अचानक, कंबल के नीचे से एक साया बाहर निकला, और

    साया बाहर निकलते ही चारों की चीखें निकल गईं। वह एक भयानक, डरावनी महिला थी, जिसके आँखों में एक अद्भुत तेज था और चेहरे पर एक खालीपन। उसकी खूबसूरत समेत खौफनाक उपस्थिति ने सबको जड़वत कर दिया।

    “क्या तुम यहाँ आये हो?” महिला की आवाज़ गहरी और डरावनी थी, जैसे वह समय के पार से आई हो। “क्या तुम अपने अंधेरों को सामने लेकर आए हो?”

    अर्जुन, जो पहले से ही खौफ का सामना कर रहा था, हिम्मत एकत्रित करते हुए बोला, “हम सिर्फ सच जानना चाहते थे। हम सुनते आए हैं कि यह जगह भूतिया है, और हम यहाँ आते ही देखना चाहते थे कि क्या यह सच है।”

    महिला ने एक हंसती हुई मुस्कान दी, लेकिन उसकी आँखों में कोई भावना नहीं थी। “सच है या झूठ, यह तुम पर निर्भर करता है। लेकिन अगर तुमने यहाँ मेरे साथ आया है, तो तुम्हें यहाँ रहना पड़ेगा।”

    सभी दोस्त एक-दूसरे को देखने लगे, उनकी आँखों में डर और घबराहट थी। संजय ने कहा, “हमें यहाँ से भागना चाहिए।” लेकिन जैसे ही उन्होंने मुड़ने की कोशिश की, दरवाजा अपने आप बंद हो गया।

    महिला ने एक कदम और बढ़ाया। “तुम्हें मेरे साथ रहना ही होगा।” उसके शब्दों में जैसे एक गहरी शक्ति थी, जो सबको और भी डराने लगी।

    “नहीं! हमें यहाँ से जाना है!” मीना ने दर्द से चिल्लाया। लेकिन उसकी आवाज़ हवेली के अंधेरों में गुम हो गई।

    महिला ने पास आते हुए कहा, “मैं तुम्हें तब तक नहीं छोड़ सकती जब तक तुम यहाँ के राज का सामना नहीं करते।” एक पल के लिए सब कुछ शांत हो गया।

    तभी एक भयानक आवाज सुनाई दी, और कमरा अजीब सी धुंध में ढकने लगा। अर्जुन ने अपनी टॉर्च की रोशनी को यहाँ-वहाँ घुमाया, लेकिन धुंध धीरे-धीरे बढ़ती गई।

    “हम क्या करें?” राधिका ने कहा। “हमें यहाँ से भागने का कोई रास्ता नहीं दिखता।”

    अर्जुन ने हिम्मत करके कहा, “हम इस महिला का सामना करेंगे और देखेंगे कि वह क्या चाहती है। हम सच्चाई जानने नहीं आए हैं तो फिर हम डरने क्यों लगे?”

    “तु…तुम सही हो,” संजय ने कहा। “हमें इसकी चुनौती स्वीकार करनी चाहिए।”

    महिला ने हल्की मुस्कान दी, और अचानक उस धुंध में कुछ काले साये उभरने लगे।

    “यहाँ की सच्चाई जानने के लिए तुम्हें एक सवाल का सामना करना होगा। जवाब सही हुआ तो तुम जा सकते हो, नहीं तो तुम यहाँ फँस जाओगे,” महिला ने कहा।

    अर्जुन ने अपने दोस्तों की ओर देखा, और फिर महिला से पूछा, “क्या सवाल है?”

    महिला ने अपनी आँखें बंद कीं और बोली, “एक प्रश्न है जो सदियों से अनुत्तरित रहा है: ‘क्या मृत्यु एक अंत है, या एक नया आरंभ?’”

    चारों दोस्तों ने एक-दूसरे की ओर देखा। यह सवाल उन्हें हैरान कर गया।

    “मृत्यु एक अंत नहीं है,” मीना ने कहा। “यह एक नया आरंभ है। यह केवल एक दरवाजा है, जो दूसरी दुनिया में खुलता है।”

    महिला ने अपनी आँखें खोलीं, और उन पर एक गहरी नज़र डाली। फिर उसने कहा, “तुम्हारा उत्तर आधा सच है, लेकिन तुम्हें इसके निहितार्थ को समझना होगा।”

    एक पल के लिए सब कुछ थम गया। फिर, बिस्तर की ओर एक पुराना आइना चमकने लगा। जैसे ही वे सब उसकी ओर देखे, उन्हें अपनी परछाईं नजर आई।

    “यहाँ रहना तुम्हारे डर का सामना करने के लिए है,” महिला ने कहा। “देखो, तुम्हारी परछाइयाँ क्या कहती हैं।”

    अर्जुन, राधिका, संजय और मीना ने आइने में अपनी परछाइयों को देखा। लेकिन उनकी परछाइयाँ उनसे अलग थीं; वह अंधेरे में लिपटी हुई और भयभीत दिख रहीं थीं।

    “ये हमारी परछाइयाँ हैं,” संजय ने कहा। “लेकिन ये डर और अनिश्चितता का प्रतीक हैं।”

    महिला ने कहा, “ये परछाइयाँ आपके अतीत के गुनाह हैं। वह डर, वह दर्द, और वह आत्म-संदेह, सब कुछ आपके भीतर का है। तुम्हें खुद से लड़ना होगा। अगर तुम अपने अंधेरों से भागोगे, तो तुम हमेशा यहाँ फँसे रहोगे।”

    अर्जुन ने सोचा, “सच में, हम हमेशा अपने भीतर के डर से भागते रहे हैं। लेकिन अब हमें उनका सामना करना होगा।” उसने गहरी सांस ली और अपने दोस्तों की ओर देखा।

    “हमें अपने डर का सामना करना होगा। हमें समझना होगा कि हम अकेले नहीं हैं।” उसने सभी को प्रोत्साहित किया।

    सभी ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ लिया और अपनी परछाइयों की ओर बढ़े। अचानक, अंधकार में एक चमक दिखी और उन्होंने देखा कि उनकी परछाइयाँ अब उनकी तरह दिखने लगीं, लेकिन उनमें आत्मविश्वास और शक्ति का आभास था।

    महिला ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तुम तैयारी कर चुके हो। अपने डर से लड़ो, और अपनी सच्चाई को पहचानो।”

    जैसे ही उन्होंने अपनी परछाइयों से संपर्क किया, एक शक्ति का अनुभव हुआ। डर और घबराहट ने उन्हें छोड़ दिया। उनकी परछाइयाँ अब उनके साथ थीं, न कि खिलाफ।

    महिला की आवाज़ अब और नरम हो गई, “तुमने अपने डर का सामना किया है। अब तुम्हें यहाँ से जाने की अनुमति है। लेकिन याद रखो, सच केवल तुम्हारे डर के पार है।”

    अर्जुन, राधिका, संजय और मीना ने एक साथ कहा, “हम यहाँ से जाने के लिए तैयार हैं!”

    आइना प्रकाश की एक चमक में बदल गया, और अचानक कमरे में रोशनी फैलने लगी। दरवाजे का लॉक अपने आप खुल गया। चारों दोस्त एकजुट होकर बाहर की ओर दौड़ पड़े।

    उनकी आँखों के सामने हवेली के चारों ओर की काली रात ने एक नई उषा का रंग ले लिया। जैसे ही वे हवा में सांस लेते हुए गाँव की ओर बढ़े, सब कुछ पहले से अधिक स्पष्ट लग रहा था।

    वे गाँव में लौट आए और अपनी कहानी साझा की। बाकी गाँव वालों ने उनकी बातों पर विश्वास नहीं किया, लेकिन उन्होंने अपनी परछाई में सुरक्षा की भावना महसूस की।

    गाँव से दूर उनकी एक अलग पहचान बन गई थी। अर्जुन और उसके दोस्त अब छोटे बच्चों को साहस और आत्म-विश्वास की कहानियाँ सुनाते थे। उन्होंने सीखा कि डर केवल एक भावना है, जिसे हमें समझने और स्वीकार करने की जरूरत है।

    गाँव के बच्चे अब कभी भी उस भूतिया हवेली से डरते नहीं थे। उन्होंने समझ लिया था कि डर का सामना करना ही असली साहस है।

    अर्जुन ने एक दिन कहा, “हमने अपनी सबसे बड़ी चुनौती का सामना किया। डर और अंधकार के पार जाकर हमने अपनी शक्ति को पहचाना। अब, हम कभी वापस नहीं लौटेंगे उस डर की ओर।”

    और इस तरह, सहरपुर गाँव में बसने वाले चार दोस्तों ने अपनी कहानी को अपने अगले पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखा, ताकि वे भी अपने डर का सामना कर सकें।

    Lakshmi Kumari