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श्रेणी: बच्चों की कहानी

बच्चों की दोस्ती साहस शरारत नटखट बदमाश प्यार समर्पण की कथाएं।

  • तारों और जुगनू

    तारों और जुगनू

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

     

     

     

     

     

    जंगल में एक छोटा सा जुगनू रहता था जिसका नाम था चमकी। चमकी बहुत चंचल था और हमेशा आसमान के तारे देखने की चाह में रहता था। उसे रात में आसमान में चमकते हुए तारे बहुत पसंद थे। चमकी हर रात अपनी छोटी-सी रोशनी के साथ जंगल में उड़ता और तारे देखने का आनंद लेता। लेकिन एक चीज उसे हमेशा परेशान करती थी—क्योंकि वह जानता था कि वह बहुत छोटा आहे, और उसकी चमक तारे के मुकाबले बहुत छोटी थी।

     

    एक रात, चमकी ने शांति से आसमान की ओर देखा। उसने एक तारे को बहुत करीब से देखा और वह बड़ा और चमकीला लग रहा था। उसने सोचा, “कितना अच्छा होगा अगर मैं भी ऐसा चमकदार और बड़ा बना पाऊँ।” लेकिन उसे यह सोचकर बहुत दुःख हुआ कि उसकी रोशनी तो बहुत छोटी है। “मेरी रोशनी किसी को नहीं दिखती,” उसने उदासी से सोचा।

     

    चमकी ने अपनी दुखी मनोदशा को समाप्त करने का निर्णय किया। उसने सोचा, “अगर मैं खुद को बदल नहीं सकता, तो मुझे अपनी चमक को पहचानने की कोशिश करनी पड़ेगी। मुझे अपनी चमक को अधिकतम करने के लिए परिश्रम करना होगा।” ऐसा सोचकर, उसने अपने आप को प्रेरित किया और अपने दोस्तों से बात करने का प्रस्ताव दिया। 

     

    उसने अपने दोस्तों से, जैसे तितली, गेंदे का फूल, और अन्य छोटे जीवों से मदद मांगी। सब उसे हंसते हुए सुन रहे थे, बताने लगे, “तुम तो बस एक जुगनू हो, क्या तुम तारे के समान चमक सकती हो?” हालांकि, चमकी ने अपने भीतर की आशा को नहीं छोड़ा। वह समझता था कि हर कोई अपनी विशेषता के साथ अद्वितीय होता है। 

     

    एक दिन, चांद की रोशनी में, उसने अपने दोस्तों को इकट्ठा किया और कहा, “मैं चाहूँगा कि मैं एक रात में चमकने के लिए अपनी पूरी कोशिश करूँ। मैं आकाश के तारे की तरह चमकने की कोशिश करूंगा।” उसने अपने दोस्तों से समर्थन मांगते हुए कहा कि वह एक शक्तिशाली रोशनी उत्पन्न कर सकता है, अगर वे उसकी सहायता करें।

     

    उसके दोस्तों ने उसकी सहयोग की बात सुनी और उसे प्रेरित किया। रंग-बिरंगी तितलियाँ उसके चारों ओर उड़ने लगीं और गेंदे का फूल भी चमकी को प्रोत्साहित करने लगा। सबने कहा, “हम तुम्हारे साथ हैं, चमकी! तुम कर सकते हो!”

     

    तब चमकी ने अपने एक दोस्त, एक साधारण कागज के फूल से भी मदद मांगी। उसने कहा, “अगर तुम मेरे साथ रहोगे, तो मैं तुम्हारी सहायता से अपनी रोशनी को और तेज़ कर सकूँगा।” फूल ने समझाया, “मैं जुगनू में विश्वास करता हूँ। तुम्हारी रोशनी की उत्तमता तुम्हारे भीतर ही है, बस तुम्हें उसे ढूंढना है।”

     

    उस रात, सबने मिलकर एक योजना बनाई। जुगनू ने सोचा, “यदि मैं अपनी रोशनी को चमकाने के लिए खुले आसमान में उड़ता रहूँगा और अपने दिल की गहराइयों से चमकूँगा, तो शायद मैं सच में चमक सकता हूँ।” उसने अपने दोस्तों के सहयोग से एक बड़े वृक्ष के नीचे एक मंडली बनाई, जहाँ सभी ने अपनी रोशनी और रंग-बिरंगे पंख फैलाए।

     

    चमकी ने पेड़ की शाखाओं पर बैठकर अपनी पूरी ताकत लगाई। वह अपनी पंखों को झपकाने लगा, और धीरे-धीरे उसकी चमक बढ़ने लगी। उसके दोस्तों ने उसका उत्साह बढ़ाया और चारों ओर से उसका समर्थन किया। सभी ने मिलकर एक सुंदर प्रदान दिया, और चमकी की रोशनी आसमान में फैलने लगी। धीरे-धीरे, चमकी ने अपनी रोशनी

    का समर्पण किया,

     

    Lakshmi Kumari 

  • जादुई दवा

    जादुई दवा

    पढ़ने का समय : 8 मिनट

    एक छोटे से गाँव में, जिसका नाम था नेहरूवाला, एक साधारण सा वैद्य था, जिसका नाम था रामू। उसे अपनी दवाइयों और औषधियों के लिए जाना जाता था। रामू का काम गाँव वालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, लेकिन उसकी दवाओं में एक खास बात थी। गाँव वाले कहते थे कि उसकी कुछ दवाएँ जादू में बदल सकती हैं। रामू खुद इस बात से अनजान था, लेकिन वह हमेशा अपने काम में लगे रहता था।

    एक दिन, गाँव में एक नई महिला आई, जिसका नाम था सुमन। सुमन की आँखों में एक अलग सी चमक थी। उसने रामू के पास आकर कहा, “मुझे तुम्हारी दवा की जरूरत है। मेरे बेटे को तेज बुखार है, और कोई और दवा काम नहीं कर रही।” रामू ने तुरंत एक जड़ी-बूटी निकाली और उसे तैयार किया। उसने सुमन को बताया कि यह दवा केवल तभी प्रभावी होगी जब इसे दिल से बनाया जाएगा।

    सुमन ने विश्वास के साथ दवा का सेवन किया। रामू ने देखा कि जैसे ही सुमन ने दवा ली, उसके चेहरे पर एक हल्का सा उत्साह आ गया। बीमार बेटा तुरंत स्वस्थ हो गया, और यह देखकर सुमन की आँखों में आंसू आ गए। वह रामू का धन्यवाद करते हुए बोली, “आपकी दवा एक जादू है! मुझे यकीन है कि यह अन्य समस्याओं के लिए भी काम करेगी।”

    गाँव में इस घटना की चर्चा होने लगी। लोग रामू के पास और अधिक समस्याएँ लेकर आने लगे। एक सप्ताह के भीतर, रामू ने महसूस किया कि उसकी दवाएँ सचमुच जादू में बदल रही थीं। कई लोग उसे अपनी आशा का अंतिम द्वार मानने लगे थे। लेकिन रामू ने सोचा कि यह सब बस संयोग है।

    फिर एक दिन, एक वृद्ध व्यक्ति, जिसका नाम था हरिदास, रामू के पास आया। वह बेहद परेशान था। “मेरी बहु बीमार है,” उसने कहा। “कोई भी दवा काम नहीं कर रही।” रामू ने फिर से एक जड़ी-बूटी तैयार की, और हरिदास ने उसे अपनी बहु को दिया। चमत्कार हुआ! बहु ठीक हो गई और हरिदास के चेहरे पर खुशी आ गई। लेकिन इस बार, रामू ने असामान्य महसूस किया। उसे लगा कि उसकी दवा में कुछ और है जो उसे नहीं पता।

    रामू की यह जिज्ञासा उसे और भी परेशान करने लगी, और वह चुपचाप अपनी दवाओं के पीछे के रहस्यमयी तत्वों का पता लगाने लगा। उसने कई पुरानी किताबें पढ़ीं, जिनमें जड़ी-बूटियों और औषधियों के बारे में ज्ञान था। धीरे-धीरे, उसे पता चला कि एक बहुत पुरानी जड़ी-बूटी, जिसका नाम ‘अमृतिका’ था, उसकी दवाओं में विशेष प्रभाव डालती थी। यह जड़ी-बूटी केवल एक ही जगह पाई जाती थी – एक प्राचीन जंगल में, जहाँ जाना असंभव था।

    एक रात, रामू ने तय किया कि वह उस जड़ी-बूटी की खोज में निकलेगा। वह जंगल की ओर बढ़ा, जहाँ उसे अंधेरे, जंगली पौधों और अजीब जीवों का सामना करना पड़ा। लेकिन रामू का इरादा मजबूत था। उसने सोचा, “यदि मैं इस जड़ी-बूटी को पा लूँ, तो मैं और भी लोगों की मदद कर सकूँगा।”

    रामू ने अद्भुत और डरावना जंगल पार करने की ठानी। पहले तो उसे रास्ता ढूँढने में दिक्कत हुई, लेकिन उसकी दृढ़ता ने उसे आगे बढ़ने का साहस दिया। जंगल में अद्भुत पेड़ और पौधे थे, जो उसे कभी-कभी मंत्रमुग्ध कर देते थे। अचानक, उसे एक चमकदार फूल दिखाई दिया,

    रामू ने जब जंगल में कदम रखा, तो उसके मन में एक अद्भुत मिश्रण था—उत्सुकता और भय। जंगल की गहराई में कदम रखते ही, उसके चारों ओर का वातावरण बदलने लगा। पेड़ों की ऊँचाई आसमान को छू रही थी और इनकी शाखाएँ एक-दूसरे से मिलकर एक ऐसी छत बना रही थीं, जिससे सूर्य की किरणें मुश्किल से नीचे पहुँच पा रही थीं। उसके कदमों की आवाज़ घनघोर सन्नाटे में फँस गई थी, और बस चिड़ियों की चहचहट और पत्तों की सरसराहट सुनाई दे रही थी।

    जंगल में चलते हुए, रामू ने पहचाना कि यह जगह उसके लिए केवल एक चुनौती नहीं थी, बल्कि यह किसी अद्भुत दुनिया की ओर संकेत कर रही थी। उसके चारों ओर चढ़ते हुए मजबूत लताएँ, रंग-बिरंगे फूल, और अजीबोगरीब जानवर उसे लगातार आकर्षित कर रहे थे। उसने पहले से सोचा था कि जंगल में ढृढ़ता और साहस की आवश्यकता होगी, परंतु उसे यह भी महसूस होने लगा कि यहाँ की सुंदरता और अनोखापन भी उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा था।

    जब वह आगे बढ़ा, तो उसकी नज़र एक चमकदार फूल पर पड़ी। यह फूल अद्वितीय था—इसके पंखुड़ियाँ नीली और सुनहरी चमक से भरी हुई थीं, मानो वह सूरज की किरणों का प्रतिबिम्ब हो। रामू ने सोच लिया कि इसे निकटता से देखना अनिवार्य है। उसने धीरे-धीरे उसके पास जाकर उसे देखने की कोशिश की। फूल की महक इतनी आकर्षक थी कि वह उसे खींच ले गई।

    जैसे ही रामू ने उस फूल के पास पहुँचकर उसे छुआ, वह एक अद्भुत अनुभव का सामना किया। उसके चारों ओर हल्की चमक फैल गई, और फूल से एक मधुर धुन निकलने लगी। यह सच में कोई साधारण फूल नहीं था, बल्कि यह जंगल का एक रहस्यमय अभेद्य गहना प्रतीत हो रहा था। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। क्या यह कोई जादुई फूल है?

    फूल के पास खड़े-खड़े, रामू ने अपने मन में अनेक विचार आने लगे। क्या इसका मतलब यह है कि इसे किसी प्रकार की मिठास या शक्ति प्राप्त है? या फिर यह एक हानिकारक जादू का हिस्सा है? लेकिन उसकी जिज्ञासा ने उसे पीछे हटने नहीं दिया। उसने अपने चारों ओर देखा और महसूस किया कि जिंदगी में कुछ खास अनुभवों के लिए आपको थोड़ी जोखिम उठानी पड़ती है।

    अचानक, फूल से फैल रही रोशनी ने एक छोटी सी दरवाज़े की आकृति बनानी शुरू कर दी। रामू के मन में सवाल उठने लगा—क्या उसे उस दरवाज़े के पार जाना चाहिए? उसके अंदर साहस और डर का एक अद्भुत मिश्रण था। उसने ठान लिया कि उसे इसका पता लगाना होगा। अपनी हिम्मत जुटाकर, रामू ने दरवाजे की ओर कदम बढ़ाया।

    जैसे ही वह दरवाजे के पार पहुँचा, उसे एक नई दुनिया में प्रवेश करते हुए महसूस हुआ। यहाँ की प्रकृति और भी अधिक अद्भुत थी। पेड़ और पौधे हर तरह की सुंदरता में लिपटे हुए थे। हवा में एक मीठी महक थी और पक्षियों का गाना इतना मधुर था कि वह मंत्रमुग्ध हो गया। यह स्थान किसी जादुई संसार से कम नहीं था।

    जैसे ही रामू उस जादुई दुनिया में कमीज़ होकर आगे बढ़ा, उसने देखा कि चारों ओर रंग-बिरंगे फूल, अनोखे पेड़ और कई प्रकार के जीव-जंतु मौजूद थे। लेकिन यहां का असली रहस्य एक मीठी महक में छुपा था, जो उसे हर कदम पर आकर्षित कर रही थी। उसने ध्यान से सुना और उसे पता चला कि यहां के जीव-जंतु आपस में किसी महत्वपूर्ण दवा के बारे में बात कर रहे थे।

    रामू ने नज़दीक जाकर सुना कि वे एक जादुई दवा के बारे में चर्चा कर रहे थे, जो केवल इस जंगल में मिलती थी। यह दवा gezondheidsproblemen में मददगार थी और प्राकृतिक रूप से ऊर्जा प्रदान करती थी। उसने यह भी सुना कि इस दवा को बनाने के लिए एक विशेष पौधे की आवश्यकता होती है, जिसे “जीवनफूल” कहा जाता है। यह फूल केवल चाँद की रौशनी में खिलता है और इसे प्राप्त करना आसान नहीं होता।

    रामू की आँखों में चमक आ गई। यदि वह इस जादुई दवा को खोज ले, तो न केवल वह अपने गाँव के लोगों की मदद कर सकेगा बल्कि इस अनुभव को भी अपने जीवन का लक्ष्य बना सकेगा। उसने निर्णय लिया कि वह “जीवनफूल” की खोज में निकलेगा। लेकिन वह जानता था कि यह असामान्य चुनौती केवल साहस से ही दूर की जा सकती थी।

    जंगल की गहरी गुफाओं में पहुँचते ही रामू ने अपने रास्ते में कई कठिनाइयों का सामना किया। उसे विशाल पेड़ों के नीचे से गुजरना पड़ा, जहां विलक्षण जीव-जंतु उसे घूर रहे थे। लेकिन रामू ने हिम्मत नहीं हारी। वह हमेशा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहा। उसके हृदय में एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा था, जो उसे हर कदम पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही थी।

    आखिरकार, चाँद की रोशनी में जब पूरी वनवासी दुनिया चाँद की सुनहरी रोशनी में नहाने लगी, तभी रामू ने दूर एक चमकदार फूल देखा। यह वही “जीवनफूल” था, जो उसने सुना था। वह खुशी से झूम उठा, लेकिन उसे अपने दिल की धड़कन को नियंत्रित करना था। उसने धीरे-धीरे उस फूल के पास जाकर उसे देखा। इसकी पंखुड़ियाँ चाँदनी की रोशनी में चमक रही थीं, और इसकी खुशबू मंत्रमुग्ध कर देने वाली थी।

    रामू ने धीरे-धीरे फूल को हाथ में लिया और उसकी पंखुड़ियाँ छू कर महसूस किया। उसे एहसास हुआ कि यह फूल न केवल उसकी खोज का वांछित फल था, बल्कि यह उस साहस और धैर्य का प्रतीक भी था, जो उसे जंगल में आगे बढ़ने के लिए मिला था।

    उसने फूले को सावधानी से अपने थैले में रखा और वापस लौटने का मन बनाया। जब वह जंगल की ओर लौट रहा था, तब उसे महसूस हुआ कि इस यात्रा ने उसे कितनी चीजें सिखा दी थीं। साहस, दृढ़ता, और सबसे महत्वपूर्ण—प्रकृति का सम्मान।

    जब वह गाँव पहुँचा, तो लोगों ने उसे कौतुहल भरी नज़रें गड़ा कर देखा। उसने “जीवनफूल” की शक्ति का विकास करके एक जादुई दवा बनाई और सभी को इसकी उपयोगिता बताई। गाँव में सबके बीच खुशी और उम्मीद की एक नई लहर दौड़ पड़ी।

    रामू ने उन सबको बताया कि जंगल में उसने न केवल दवा खोजी थी, बल्कि एक नई दुनिया का भी अनुभव किया था—एक ऐसी दुनिया, जहां प्रकृति की शक्ति और मानव के साहस का अद्भुत तालमेल था। अब वह सिर्फ दवा के माध्यम से नहीं, बल्कि जिन्दगी के हर छोटे-बड़े अनुभव से गाँववालों की मदद करना चाहता था।

    इस तरह, रामू की यात्रा समाप्त हुई, लेकिन उसके द्वारा अर्जित ज्ञान और साहस हमेशा उसके साथ रहेगा।

    Lakshmi Kumari……

     

  • एक अनोखा रिश्ता

    एक अनोखा रिश्ता

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    राहुल अपने मम्मी पापा  के साथ मुंबई में एक फ्लैट में रहता था ,वह अपने दोस्तों के साथ सामने के खाली पड़े फ्लैट के सामने हमेशा अपने दोस्तों के साथ खेलता था , एक दिन उस फ्लैट में अचानक ही फर्नीचर का काम चालू हो गया ,और पता चला कि उस फ्लैट में अब कोई रहने आने वाला है। इससे राहुल और उसके दोस्त बहुत उदास हो गये। पर फिर भी उन्होंने फ्लैट में खेलना नहीं छोड़ा। 

    राहुल और उसके दोस्तों को शैतानी करते देखकर फर्नीचर वाले अंकल उन्हें हमेशा डांट कर भगाते थे पर वह नहीं सुनते थे।

    एक दिन राहुल अपने  दोस्तो के साथ फ्लैट में खेल रहा था और सामने फर्नीचर का काम भी चल रहा था , तभी वहां एक औरत एक छोटी सी  लड़की को लेकर आई।

     उसकी छोटी-छोटी आंखें और दबी हुई सी नाक थी। वो लड़की हमें डरी हुई नज़रों से देख रही थी, हमने उन्हें देखकर खेलना बंद कर दिया था।

    “शायद ये लोग ही यहां रहने आए है।” अजय ने धीरे से राहुल के कान में कहा। 

    उसकी बात सुनकर राहुल के चेहरे में मुस्कान आ गई, उसे बड़ी खुशी हुई कि अब उनकी गैंग में एक और सदस्य जुड़ जाएगा। 

    उस लड़की की नज़रें जैसे ही राहुल की नजरो से टकराई तो राहुल के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

    जब उस लड़की ने देखा कि मैं उसे देख कर मुस्करा रहा हूं, तो उस लड़की ने राहुल से मुंह फेर लिया। 

    उस लड़की के ऐसे मुंह फेरने से राहुल का चेहरा उतर गया , उसे बड़ा अजीब सा लगा और वह जल्दी से अजय के साथ वहां से चला गया।

    अब राहुल और अजय ने वहां पर खेलना बन्द कर दिया क्योंकि वो लोग फ्लैट में रहने लगे थे ।

    एक दिन राहुल की मम्मी सीमा उसके पापा से बात के रही थी ।

     ” सुनो जी मैंने सुना वो सामने वाले घर में जो लोग आए है ,वह  हिमाचल से आए हैं। बस मां बेटी रहती है ,सुना है बच्ची  के मम्मी-पापा का तलाक हो चुका था “।

    अक्षय सीमा से बोला ,” छोड़ो ,हमे क्या करना है , वह उनका निजी मामला है “!

    राहुल अपनी मम्मी पापा की बात सुनकर वहां से चला गया।

    अब राहुल और अजय अपने और दोस्तों के साथ बिल्डिंग के नीचे वाले गार्डन में खेलते थे।

    राहुल एक दिन खेल था , तभी उसकी नजर बालकनी में खड़ी उस लड़की में पड़ी , जो  कभी अपने घर से बाहर नहीं निकलती थी ,पर कभी कहीं गलती से बालकनी में खड़ी दिख भी जाती, तब भी उसे देखकर अंदर चली जाती थी। आज भी वही हुआ जैसे ही राहुल और उस लड़की की नजरे टकराई ,वो लड़की अन्दर भाग गई।

    कुछ दिनों बाद दीवाली आई और  शाम को घर  में पूजा हुई और पूजा खत्म होने के बाद सीमा ने राहुल को प्रसाद देते हुए कहा ,” जाओ राहुल ये प्रसाद लेकर सामने वाले फ्लैट की आंटी को दे दो। 

    राहुल प्रसाद लेकर जैसे ही सामने वाले घर में गया तो दरवाज़ा उस लड़की ने ही खोला, पर राहुल ने उसे इग्नोर किया और उसकी मम्मी के पास गया।

    “ आंटी मम्मी ने प्रसाद दिया है और कहा है कि आप लोग हमारे साथ दिवाली मनाएं।” राहुल ने उसकी मम्मी को प्रसाद पकड़ाते हुए कहा।

    “बेटा…हम दिवाली नहीं मनाते… बैठो मैं अभी आती हूं” आंटी ने राहुल को बैठने का इशारा करते हुए कहा और किचन से राहुल के लिए कुछ खाने के लिए लेने चली गईं। 

    “तुम्हारा नाम क्या है “? राहुल ने पूछा।

    वो लड़की बहुत देर चुप रहने के बाद बोली ,” आकांक्षा “!

    “तुम्हें पटाखे जलाना अच्छा नहीं लगता?” राहुल ने उस लड़की से पूछा।

    “हां” बहुत देर तक चुप रहने के बाद आखिर कर वो लड़की बोली।

     “तुम चलो बाहर हम साथ में पटाखे जलाएंगे” राहुल ने कहा।

    “नहीं मम्मी बाहर जाने से मना करती हैं।” लड़की कहने लगी।

    “अच्छा। हमसे बात करने के लिए भी?” राहुल ने  चौंक कर पूछ लिया।

    “नहीं।…उन्हें डर लगता है, लोग हमारा मज़ाक बनाते हैं।” लड़की ने धीरे से कहा।

    “क्यों?” राहुल ने पूछा।

    “क्योंकि हमारी छोटी आंखें हैं ना… हम यहां पहले रहते थे, वहां सब बच्चे मुझे चाइनीज.. चाइनीज…बोलकर चिढ़ाते थे। एक दिन मुझे गुस्सा आ गया। मैंने एक लड़के को घूंसा मार दिया। फिर उसकी मम्मी ने मेरी मम्मी से बहुत झगड़ा किया। मेरे पापा-मम्मी के बारे में गंदी-गंदी बातें की। फिर हमने वो घर छोड़ दिया। इसलिए ही मम्मी यहां किसी से बात करने के लिए मना करती हैं।” अभी  वो बता ही रही थी कि उसकी मम्मी आ गई।

    “आंटी आप नहीं आ रही तो मैं इसे ले जाऊं? हम साथ में पटाखे जलाएंगे, प्लीज़ आंटी।” राहुल ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा तो कुछ देर बाद उसकी मम्मी मान गईं।

    राहुल ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “डरो मत यहां कोई तुम्हारा मज़ाक नहीं बनाएगा।”  और वो दोनों बाहर जाकर पटाखे जलाने लगे ।

    तभी कुछ बच्चे आए और आकांक्षा का मजाक बनाने लगे।

    आकांक्षा सबको अपना मजाक बनाता देख रोते हुए भागने लगी।

    जब बालकनी में खड़ी उसकी मां ने आकांक्षा का मजाक बच्चों को उड़ाते देखा तो वह भागकर नीचे चली गई।

     इधर आकांशा भागकर जा ही रही थी कि वह सीमा और अक्षय से टकरा गई।

    सीमा ने आकांक्षा को गले लगाते हुए कहा,” क्या हुआ बेटा तुम ऐसे रो क्यों रही हो “?

    राहुल भी वहां आ गया और उसे सब बात बता दी।

    जब सीमा ने अब बाते जानी तो वह आकांक्षा के आंसु पोछते हुए बोली ,” बेटा रोते नहीं लोग तो बाते बनाते रहते है ,उनकी बातो को दिल में नहीं लेते ,तुम भागेगी तो वह तुम्हे कमजोर समझेंगे ,और बार बार वही करेंगे ,तुम इन सबका डटकर सामना करो “!

    आकांक्षा की मां राधा जैसे ही वहां आई  ,तो  उन बच्चों की मां बाते बनाने लगी ,” इस औरत का पता नहीं यहां कैसे आई ? पति से तलाक क्यों लिया और कोई पति है भी या नहीं ? कौन जानता है  सच “!

    सबको बात बनाता देखकर राधा की आंखे भर आई , सीमा सबको डांटते हुए बोली ,” चुप हो जाओ तुम अब ,शर्म नहीं आती एक औरत होकर दूसरी औरत के बारे में ऐसी बात। करते हुए “?

    सीमा की डांट सुनकर अब चुप हो गए।

    अक्षय गुस्से से बोला ,” आप सब ऐसे बाते मत बनाइए राधा बहन के बारे में ,किसकी क्या मजबूरी है कोई भी जानता, यह एक ईजेदार महिला है इन्हें ऐसे परेशान मत कीजिए ,अब जमाना बदल गया है ,एक औरत कमजोर नहीं ,वह अकेले भी खुद का और अपने बच्चों का अच्छा पालन पोषण कर सकती है”।

    अब सब लोगों ने नजरे झुका ली।

    अक्षय ने आकांक्षा को गोद में लिया और बोला ,” यह देखिए इस मासूम सी बच्ची को ,आप जैसे समाज के ठेकदारों की वजह से इसकी आंखों में आंसु है ,सब कहते है बच्चे भगवान का रूप होते है ,तो क्या आपको शोभा देता है ऐसे किसी बच्चे को परेशान करता देखकर “!

    सभी को अपने किए पर शर्मिंदगी हुई और उन्होंने राधा और आकांशा से माफी मांगी।

    उसके बाद सभी ने साथ मिलकर दिवाली मनाई ,और राहुल और उसके दोस्तों के साथ आकांशा ने खूब पटाखे जलाए।

    इस तरह राहुल और आकांशा दोस्त बन  गए ,और उनके बीच दोस्ती का एक अनमोल रिश्ता बन गया।

    Mysterious chand