” मिस्टर भाटी कॉम यू ऑन द स्टेज ”
बोलकर प्रोफेसर दयानन्द, प्रोफेसर विश्वनाथ भाटी का स्वगत किए थे। पहले सभी प्रोफेसर्स को बारी बारी से बोलना था। लास्ट में सभी बच्चों को प्रिंसिपल मैम संबोधन करने वाली थीं।
प्रोफेसर भाटी अपने जगह से उठकर माइक के पास आते हैं।और बोलते हैं।
” जय श्री कृष्ण बच्चो ”
स्टूडेंटस के भीड़ भी एक साथ बोलते हैं।
” जय श्री कृष्ण”
प्रोफेसर भाटी आगे बोलना स्टार्ट किए थे।
” तो मेरे बच्चों,जैसा की आपको बताया गया है।अभी अभी आप सब को प्रोफेसर दयानन्द सर बता रहे थे। की भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन मनाने के बारे में, हमारे कॉलेज ने फैसला लिया है। कि अपने कॉलेज में उस दिन पुजा पाठ भजन सांस्कृतिक कार्यक्रम और श्री कृष्ण रचित लीलाओं का नाट्य प्रदर्शन कर दिखाया जाना है। जिसमें आप सब लोग भी सहभागी बनेंगे। आप लोग वह लीला मंचन देख और सुन कर श्री कृष्ण के लीलाओं को आप अपने जिवन में उतारेंगे और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को अपने दोस्तों मित्रों के साथ शेयर करेंगे। इन्ही बातों के साथ हम अपनी वानी को विराम देते हैं। धन्यवाद बच्चों।”
इसी के साथ एक बार फिर तालियों के गर गड़गड़ाहट से पुरा मीटिंग हॉल गुंज उठता है। अब फिर से माइक प्रोफेसर दयानन्द जी के हांथ में थे। और वो फिर से बोलना स्टार्ट कर चुके थे।
” हां तो बच्चो, अभी आप लोग प्रोफेसर भाटी को सुन रहे थे। मुझे आशा नहीं उम्मीद है कि ,आप सभी उनके बताए बातों पर गौड़ करेंगे।”
सभी स्टूडेंट्स के तरफ देखते हुए पुछते हैं।
” उनके बातों पर गौड़ करेंगे ना बच्चों?”
सभी स्टूडेंट्स एक साथ बोलते हैं।
“जी सर।”
फिर प्रोफ़ेसर दयानन्द बोलते हैं।
” अब मैं आप लोगों के बीच, प्रोफेसर शास्त्री आयेंगे और अपनी बात को रखेंगे।”
एक बार फिर सारा हॉल तालियों से गुंज उठता है। प्रोफेसर शास्त्री जी आते हैं। और अपने हांथ में माइक लेकर बोलना स्टार्ट कर देते हैं।
इधर शीला चांदनी राधा और रूपा कमल को लिए मीटिंग हॉल के रास्ते पर चल रहे होते हैं। सभी सहेलियों के चेहरे पर चिन्ता की लकीर साफ झलक रही थी। सभी के मन में खुशी भी थी की अब सब कुछ नोर्मल हो गयी थी। या प्रिंसिपल मैम से मिलने के बाद सब कुछ ठीक हो जाने वाली थी। कमल के हाल की बात करें तो, उसका हाल बिल्कुल भी ठीक नहीं था। वो तो यही सोच सोच कर घबरा रहा था। की जब उसे प्रिंसिपल मैम के पास लेकर जाया जायेगा, तो फिर क्या होगा उसके साथ। उसको सारा कॉलेज के सामने बदनामी उसके दोस्तों के बीच में बेइज्जती उसके मम्मी पापा के बदनामी की बहुत चिंता होने लगी थी। भाई जब तुम्हे ये सब की चिन्ता थी। तो पहले ना सोचना था, की हम ये सब कर्म ना करें।जिससे हमारी इतनी बदनामी हो। उस टाइम तो बहुत बड़ा हिरो बन रहा था। की मेरे बढ़कर कोई हिरो है हीं नही इस दुनियां में,जब कर्म किया है तो फल भी तो मिलेगा। लेकिन उसके दिमाग में एक खुराफात आइडिया भी आता है। कि इन सब से अपने आप को छुड़ा कर भाग जायें। कहते हैं ना, जब काल सर पे नाचने लगता है।तो बुद्धी का विनाश हो जाता है। यही सब कमल के साथ अभी हो रहा था। शीला और चांदनी कमल को पकड़े हुए चल रहे हैं। की तभी एका एक जोरदार झटके के साथ,कमल दोनो से अपना हांथ झटक कर छुड़ा लेता है। और जोर से दोनो को धक्का दे कर गिरा देता हैं। और भागने लगता है।
” पकड़ो राधा उसे ”
चांदनी जो कमल के धक्के खा कर सड़क पर गिरी थी। जोर से बोली थी ।
” पकड़ो पकड़ो भागने ना पाये।”
शीला भी नीचे पड़े पड़े हीं बोली थी। रूपा और राधा जो थोड़ा पिछे पिछे चल रही थी। कमल को भागते हुए देखी तो उसे दौड़कर पकड़ना चाहा पर उसे भी कमल झटक कर भाग गया था। शीला उठकर खड़ी हो गई थी। चांदनी भी उठ गई थी।
” चलो दौड़कर पकड़ते हैं। कितना दूर भागेगा।”
शीला बोली और दौड़ने लगी
” चोट लगा है उसे, ज्यादा तेज नहीं भाग सकता है। हम पकड़ लेंगे उसे।”
चांदनी दौड़ते हुए बोली थी। राधा और रूपा भी कमल को पकड़ने के लिए सरपट दौड़ने लगी थी।
” इस बार पकड़ाया तो छोडूंगी नहीं उसे, बीना हांथ पांव तोड़े।”
रूपा गुस्से में दांत पीस कर जोर से बोली थी।
” यह सब मेरी वजह से हुआ है। हमने ध्यान नहीं दिया उसपर और वो भाग गया।”
राधा अपने आप को ब्लेम करते हुए रूआंसी आवाज में बोली थी।
” तुम्हे खुदको कोसने की कोई जरूरत नही है राधा, इसमें हम सब की गलती है।”
शीला राधा से बोली थी।
” हां दीदी ठीक कह रहीं है। आप अपने आप को दोशी नहीं मानिए।”
बोल कर रूपा भी राधा को समझाने की कोशिश कर रही थी। बेचारा कमल ज्यादा दूर तक नहीं भाग पाया था। भागते भागते एक बिल्डिंग के पीछे दीवार से सटकर जोर जोर से सांस ले रहा था।कमल अपने पीछे चारो लड़कियों को दौड़ते हुए देख लिया था। यही सोचकर वो सभी लड़कियों के ध्यान डायवर्ट करने के लिए छुप गया था। ये सभी सहेलियां भी कमल का पीछा करते हुए उसके पीछे भाग रही थी। तभी शीला के पैर सड़क किनारे रखे एक पत्थर के टुकड़े से टकरा जाती है। वो गिर जाती है। ये देखकर सभी रूक जाती है। पर शीला उन लोगो को रूकने से मना करती है।
” तुम लोग मेरी फ़िक्र मत करो और उसे दौड़ कर पकड़ो, नहीं तो वो भाग जायेगा।”
शीला अपना दर्द बर्दास्त करने के प्रयास करते हुए कराह कर बोली थी।
” नहीं दीदी तुम्हें चोट लगी है। और ऐसे मे…”
चांदनी अभी अपनी बात पूरी कर पाती इससे पहले हीं चांदनी के बात को बीच मे से हीं काटते हुए शीला बोली।
” नही मेरी छोड़ो तुम लोग और उसे पकड़ो तुम लोग नही तो वो भाग जायेगा।”
” दीदी आपको तो…”
राधा भी अपनी बात पूरी नहीं कर पायी थी। कि शीला की चीखती हुई आवाज सभी के कानों में पड़ती है।
” उसे पकड़ना जरूरी है। मेरी चोट को नहीं।”
तीनो सहेली समझ चुकी थी। की उसे क्या करना है। और वो सभी चल पड़े थे वे करने। समय भी देखिए ना कैसा खेल खेलता है ।शीला को चोट वहीं जाकर लगी थी। जिस बिल्डिंग के पीछे कमल छीपा था। वो बात अलग थी की वो अकेली थी। और चोटिल भी हो गयी थी। चांदनी राधा और रूपा दुबारा से दौड़ने लगी थी ! कमल इन लोगों को दौड़ते हुए आगे जाते हुए देख रहा था। वो सोच रहा था कि ये लोग दूर चले जायेंगे। तो हम निकल कर दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर भाग जायेंगे। कहते हैं ना जो होता है अच्छे के लिए होता है। शीला वहीं थी जहां कमल छुपा हुआ था ।
इधर चांदनी रूपा राधा भागते भागते दूर निकल गयी थी। और एक जगह पर जाकर तीनो सहेलियां रूक गयी थी। हुआ ये था की दौड़ते दौड़ते उन लोगों को एक टी प्वाइंट मिल गया था। वहां पर तीन रास्ता जा रहा था। एक रास्ते से तो वो तीनो आई हीं थी। और एक रास्ता इधर जा रहा था । तो दूसरा रास्ता उधर इसी लिए तीनो वही रूक गयी थी। की वो कौन रास्ते में जाये पता नहीं कमल कौन से रास्ते से भागा होगा और वो कौन रास्ता पकड़े यही कंफ्यूजन में तीनो सहेलियां वहीं रूक गयी थी।
” अब किधर जायें दीदी ?”
राधा कंफ्यूज होते हुए चांदनी से पूछी थी।
” यहां पर कोई है भी नहीं, जिससे पूछ सकें की क्या कमल को देखा है।”
रूपा भी चांदनी से बोली थी।
” कोई दिमाग लगाना पड़ेगा।”
चांदनी दोनो के आंखों में झांकते हुए बोली थी।
” पर कैसे”
थोड़ी देर सोचने के बाद चांदनी बोली थी कि।
” हम कमल को अलग अलग ढूंढेंगे। राधा तुम उस साइड जाओगी मैं इस तरफ जाती हूं। और रूपा तुम दीदी के पास जाओगी उन्हे चोट लगी हैं। तुम उनका ख्याल रखोगी।”
” पर दीदी आप लोग अकेले कैसे कमल को पकड़ोगी कही वो आप लोगों को?”
रूपा बोलते बोलते रूक गयी थी।
राधा बोली
” एक आइडिया है दीदी।”
” क्या आईडिया है। जल्दी बोलो।”
राधा के तरफ देखते हुए चांदनी बोली थी। सही टाइम पर दिमाग भी सही चलता है सही लोगों का।
” हमलोग मोबाइल मे ग्रुप बना लेते है। सभी चारो सहेलियों को ग्रुप कॉल करना है। जिसे भी कमल दिखेगा वो कॉल करेगी और बतायेगी फिर हम लोग जल्दी से वहां पहुंच जायेंगे।”
राधा अपनी पूरी प्लानिंग बताई थी।
” पर शीला दीदी को तो पता हीं नही है। ये बात तो वो कैसे कर पायेंगी कॉल।”
रूपा बोली और दोनो को आशचर्य से देखने लगी थी।
” दीदी के पास तुम जा रही हो, तो तुम करोगी कॉल अगर तुन्हें कमल दिखा तो।”
” राधा तुम ग्रुप बनाओ जल्दी से टाइम नही है।”
चांदनी दोनो को ऑर्डर देते हुए बोली थी। कुछ हीं देर में राधा मोबाइल में टाइप करके ग्रुप बना लेती है।
” बन गया दीदी ग्रुप।”
.राधा चांदनी से बोली थी।
” ठीक है ओके तो तुम जाओ उधर।”
चांदनी राधा को हांथ से एक तरफ इशारा करते हुए बोली थी। और बात आगे बढाते हुए फिर बोली
” मैं इधर जा रही हूं। और रूपा तुम दीदी के पास जाओ जल्दी से।”
राधा और चांदनी एक साथ बोली थी।
” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं।”
रूपा बोलती है।और सभी अपने अपने रास्ते चल दिए थे।
पढिए आगे कि कहानी अगले भाग में……प्यार एक अहसास…..
नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

प्रातिक्रिया दे