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सच्चाई…

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

अगर सब कुछ पेसो से ख़रीदा जा सकता तो… मंदिरो में यु पेसो वाली की भीड़ ना लगती… सब कुछ पैसा नहीं पर सब पैसे के लिए ही जीते है.. आज अब अगर पैसा है तो नाम है वरना आप गुमनाम है.. पेसो के लिए ना कोई रिश्ता रह पता और ना कोई इंसानियत.. काश की इंसान जल्दी ही समझ पाते की पैसा ही सब नहीं… ✍️✍️

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Rani Thakur

NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

Comments

“सच्चाई…” के लिए प्रतिक्रिया 2

  1. lovely jo अवतार
    lovely jo

    Pesa sab na hokar bhi sab kuch h 🥲🥲

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