अगर सब कुछ पेसो से ख़रीदा जा सकता तो… मंदिरो में यु पेसो वाली की भीड़ ना लगती… सब कुछ पैसा नहीं पर सब पैसे के लिए ही जीते है.. आज अब अगर पैसा है तो नाम है वरना आप गुमनाम है.. पेसो के लिए ना कोई रिश्ता रह पता और ना कोई इंसानियत.. काश की इंसान जल्दी ही समझ पाते की पैसा ही सब नहीं… ✍️✍️
सच्चाई…

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Comments
“सच्चाई…” के लिए प्रतिक्रिया 2
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बहुत सुंदर 🌹🌹
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Pesa sab na hokar bhi sab kuch h 🥲🥲
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