🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

टैग: #प्रेरणा दायक कहानी#सपनों का पुल

  • सपनों का पुल

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक प्यारा बच्चा रहता था। आरव को सपने देखना बहुत पसंद था। हर रात वह आँखें बंद करता और एक नई दुनिया में चला जाता—जहाँ रंग-बिरंगे पेड़ होते, उड़ते हुए फूल होते और हँसती हुई नदियाँ होतीं।

    एक दिन उसने अपने सपने में एक अनोखा पुल देखा। वह पुल साधारण नहीं था—वह “सपनों का पुल” था। यह पुल इंद्रधनुष के रंगों से बना था और बादलों के ऊपर तैरता था। पुल के एक छोर पर “डर” खड़ा था और दूसरे छोर पर “हिम्मत और खुशी”।

    आरव पहले तो डर गया। उसने सोचा, “अगर मैं गिर गया तो?” तभी एक छोटी सी चिड़िया आई और मुस्कुराते हुए बोली,

    “डर को पार करना है तो पहला कदम बढ़ाना होगा।”

    आरव ने गहरी साँस ली और पुल पर कदम रखा। जैसे ही उसने पहला कदम रखा, पुल थोड़ा और चमकने लगा। हर कदम के साथ उसका डर कम होता गया और उसका आत्मविश्वास बढ़ता गया।

    चलते-चलते उसे रास्ते में कई बच्चे मिले। कोई कह रहा था, “मुझे चित्र बनाना है, पर मैं अच्छा नहीं हूँ।” कोई कह रहा था, “मुझे गाना गाना है, पर लोग हँसेंगे।”

    आरव मुस्कुराया और बोला, “चलो, हम सब साथ चलेंगे। यह पुल हमें सिखाता है कि कोशिश करने से ही सपने पूरे होते हैं।”

    सब बच्चों ने मिलकर एक-दूसरे का हाथ थाम लिया और आगे बढ़ते गए। जैसे ही वे पुल के अंत तक पहुँचे, वहाँ एक सुंदर बगीचा था—जहाँ हर बच्चे का सपना सच हो रहा था।

    आरव ने देखा, जो बच्चा डर रहा था, वही अब खूबसूरत चित्र बना रहा था। जो गाने से डरता था, वह खुशी-खुशी गा रहा था। सबके चेहरे पर मुस्कान थी।

    तभी वही चिड़िया फिर आई और बोली,

    “यह पुल हर बच्चे के अंदर होता है। जब तुम अपने डर से आगे बढ़ते हो, तो तुम्हारा ‘सपनों का पुल’ तुम्हें तुम्हारी खुशी तक ले जाता है।”

    अगली सुबह जब आरव जागा, तो वह बहुत खुश था। उसने तय किया कि वह अपने सपनों से कभी नहीं डरेगा और हमेशा पहला कदम बढ़ाएगा।

    सीख:

    डर हमें रोकता है, लेकिन हिम्मत हमें आगे बढ़ाती है। जब हम अपने सपनों की ओर पहला कदम उठाते हैं, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं।

    1. और तब से, हर रात आरव अपने सपनों के पुल पर चलता… और हर दिन अपनी असली जिंदगी में एक कदम आगे बढ़ाता। 🌈