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  • 💞💞प्यार का नशा… पार्ट 3💞💞

    💞💞प्यार का नशा… पार्ट 3💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे,

    वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या हुआ? तुम कहीं और ही लग रहे हो।”

    रिशाल जल्दी से अपने आप को संभालता है और कहता है, “माँ, मीटिंग तो ठीक रही। बस थोड़ा थकान है।”

    वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो। 

    लेकिन रिशाल का मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू को याद करता है और उसके लिए अपने दिल में एक अजीब सा हलचल महसूस करता है…:

    वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को जब देखती हैं तो उसे लगता है कि वह किसी बात से परेशान है। वह रिशाल के पास जाती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या सब ठीक है? तुम्हारे चेहरे पर तनाव दिख रहा है। क्या तुम मुझे कुछ बताना चाहते हो?”

    रिशाल वरुणा देवी की बात सुनता है, लेकिन वह कुछ नहीं बताता। वह जल्दी से एक बहाना बनाता है और कहता है, “माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है। मुझे लगता है कि मैं थोड़ा थक गया हूँ। मैं कुछ देर अकेले में आराम करना चाहता हूँ।”

    रिशाल अपने हाथ में रखे हुए अमानत के बाल के टुकड़े को देखता है और सोचता है,

    वरुणा अग्निहोत्री जब अपने बेटे के सर दर्द की बात सुनती है, तो तुरंत घर के नौकर, रामू को आवाज़ लगाती है, “रामू, रामू! जल्दी आओ और मुझे तेल लेकर आओ। रिशाल को सर दर्द हो रहा है।”

    रामू वरुणा देवी की आवाज़ सुनकर जल्दी से आता है और पूछता है, “मैम, कौन सा तेल लाऊं? कोकोनट का या बदाम का?”

    वरुणा देवी कहती हैं, “बदाम का तेल लाओ। और जल्दी करो। रिशाल को आराम करना है ।”

    रामू बदाम का तेल लेकर आता है और वरुणा देवी को देता है। वरुणा देवी तेल को लेकर रिशाल के कमरे में जाती हैं और उसके सर पर तेल से मालिश करने को कहती हैं, 

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करने के लिए कहती हैं, “बेटा, मैं तुम्हारे माथे की मालिश कर दूँ। इससे तुम्हारा सर दर्द कम होगा।”

    लेकिन रिशाल मना कर देता है, “नहीं, माँ। मैं ठीक हूँ। तुम्हें परेशान नहीं होना चाहिए।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल की बात नहीं मानती और कहती हैं, “नहीं, बेटा। तुम्हारी सेहत मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट है। मैं तुम्हारे माथे की मालिश करूँगी।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल को अपने पैरों के पास बैठने के लिए कहती हैं और खुद बेड पर बैठ जाती हैं। वह रिशाल के माथे पर तेल लगाती हैं और धीरे-धीरे मालिश करने लगती हैं, 

    रिशाल अपनी माँ की चम्पी से खुश होता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, 

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “बेटा, तुम्हें आराम करना चाहिए । मैं तुम्हारे लिए खाना भिजवा दूंगी ऊपर ही । तुम्हें कुछ नहीं करना है। बस आराम करो।”

    रिशाल वरुणा देवी की बात मानता है और आराम करने लगता है। लेकिन उसके मन मे अमानत के साथ बीते पल ही रहता है…

    वरुणा अग्निहोत्री की चम्पी धीरे-धीरे रिशाल को भी अच्छा लगने लगता है।

    .. to be continue….

     

  • 💞💞प्यार का नशा पार्ट 2 💞💞

    💞💞प्यार का नशा पार्ट 2 💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट
    • कहानी अब आगे,

    अमानत ने रिशाल की बात सुनी और उसकी आँखों में आंसू आ गए।

     “मुझे माफ कर दीजिए, मैं आपको नहीं जानती थी। मैं सिर्फ अपने भाई के साथ घूमने आई थी, और उसकी साथ खेलते हुए बस गलती से आपसे टकरा गयी मे माफ़ी मांगती हु pls माफ कर दीजिये “

    रिशाल ने अमानत को देखा और उसकी मासूमियत को देखकर उसका गुस्सा थोड़ा कम हो गया । लेकिन फिर भी वो अपने गुस्से को कण्ट्रोल नहीं कर पाया और वो गुस्सा अमानत पर निकल दी उसे काफ़ी कुछ सुना कर |” 

    अमानत ने रिशाल की बात सुनी जिससे उसके आँखों में आंसू आ गए। वह अपने भाई के साथ वहाँ से चली गई, लेकिन रिशाल की बातें उसके दिल में बस गईं…

    रिशाल ने अमानत को वहाँ से जाने दिया और अपनी मीटिंग में चला गया। लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही था। वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू देखकर थोड़ा परेशान हो गया था।

    मीटिंग खत्म होने के बाद, रिशाल अपने घर चला गया। लेकिन उसका मन अमानत के बारे में ही सोच रहा था। वह अपनी शर्ट के बटन को देखकर अचानक रुक गया। उसमें एक बाल फंसा हुआ था, जो अमानत का था।

    रिशाल को वो बाल को देख, अमानत की याद आ जाती है और वो उसी मे खो जाता है । वह सोच रहा था कि क्या उसने अमानत के साथ ठीक बर्ताव किया था। उसने अमानत को रुला दिया था, और अब उसे इसका अफसोस हो रहा था।

    रिशाल ने अपनी शर्ट उतारी और उस बाल को अपने हाथ में लिया। वह अमानत के बारे में सोच रहा था, और उसकी मासूमियत को याद कर रहा था।

    तभी एंट्री होती है, 

    वरुणा देवी, रिशाल की माँ, कमरे में आती हैं और रिशाल को अपने हाथ में कुछ पकड़े हुए देखती हैं। वह उसके पास जाती हैं और पूछती हैं,

    वरुणा अग्निहोत्री, “क्या है यह, रिशाल? तुम क्या कर रहे हो?”

    रिशाल जल्दी से उस बाल के टुकड़े को अपने हाथ में छिपा लेता है और कहता है, “कुछ नहीं, माँ। बस एक छोटी सी चीज़।”

    वरुणा देवी को लगता है कि रिशाल कुछ छिपा रहा है, लेकिन वह कुछ नहीं कहतीं। वह रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “क्या हूआ सब ठीक है न , रिशाल? तुम थोड़े परेशान लग रहे हो।”

    रिशाल वरुणा देवी को देखता है और मुस्कराता है, “हाँ, माँ। सब ठीक है। बस थोड़ा थकान है।”

    वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो। मैं तुम्हारे लिए चाय मंगवा देती हूँ।”

    जैसे ही वरुणा देवी जाती हैं, रिशाल अपने हाथ में छिपाए हुए बाल के टुकड़े को देखता है और अमानत के बारे में सोचता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है और उससे माफ़ी मांग सकता है, क्युकी कहीं न कहीं उसने गुस्से मे अमानत को कुछ ज़्यदा ही सुना दिया था और अब RA को उसकी लिए गिलट हो रहा था |” 

    वरुणा देवी रिशाल के लिए चाय लाती है और रिशाल के पास आकर बैठती हैं और पूछती हैं, “आज की मीटिंग कैसी रही, रिशाल? क्या हूआ सब ठीक रहा न ?”

    रिशाल को माँ की मीटिंग की बात सुन जुहू बिच पर हुई इंसिडेंट अमानत की याद आ जाती है और वह उसी में खो जाता है। वह वरुणा देवी की बात को सुनता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है।

    … to be continue….

  • 💞💞 प्यार का नशा 💞💞

    💞💞 प्यार का नशा 💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    ## जुहू बिच ( मुंबई ) ##

    समुद्र के किनारे जुहू बीच पर, मुंबई की एक सुबह , सूरज की पहली किरणें समुद्र से निकलती हुई लग रही थीं।

          “” रिशाल अग्निहोत्री, जो एक अमीर बिजनेसमैन है, की कार आकर उस जुहू बिच के किनारे लगती है और फिर रिशाल अग्निहोत्री , अपनी कार से उतरते हुए, जुहू बीच की ओर चल देता है । वो यहाँ एक इम्पोर्टेन्ट मीटिंग के लिए आया हूआ था, जो उसके बिजनेस के फ्यूचर को बदल सकती थी।

    जैसे ही वह बीच पर एंट्री लेता है सबही उसकी तरफ देखने लगते है, आखिर रिशाल अग्निहोत्री था ही इतना डेसिंग और चार्म बिलकुल किसी हीरो के तरह उसकी चेहरे पर पैसे का रोव जो होता है, वो साफ नजर आ रहा था, थोड़ा खड़ूस ओर थोड़ा अड़ियल सा रिशाल अग्निहोत्री ,

    वही दूसरी और एक मासूम सी भोली भाली लड़की अमानत , जो अपने भाई के साथ समुद्र के किनारे घूमने आई हुई थी, छोटी छोटी खुशियों को इक्क्ठा करने वाली हमारी अमानत, जो अपने भाई के साथ अपने जन्मदिन की शाम मनाने आई थी, अपने भाई के चेहरे पर खुशियाँ लाने आई थी, आखिर था ही कौन उसका इस जहा मे उसकी छोटे भाई व्योम के अलावे ।

    एक तरफ RA अपनी मीटिंग की तैयारी में था, की तभी उसकी कान मे एक आवाज़ आई और उसने अपनी नजर उठा कर उस आवाज़ के तरफ देखा, वह उसकी मासूमियत और सुंदरता से आकर्षित हो गया। लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कर पाता, अमानत उसके साथ आकर गलती से टकरा गई।

    अमानत के हाथ से उसका फोन और पर्स गिर गए, और रिशाल ने जल्दी से अमानत को पकड़ लिया पर इन सब मे रिशाल आमनात को ले उस बिच के किनारे गिर जाता है जहा अंदर रिशाल और ऊपर अमानत दोनों उस बिच की मिट्टी मे लोट पोत हो जाते है,दोनों एक दूसरे के आँखों मे कुछ पल देखते है, रिशाल के आँखों मे जहा एक जूनून और गुस्सा था वही अमानत के आँखों मे डर साफ नजर आ रहा था, तभी जल्दी से अमानत खरी हो जाती है और रिशाल से माफ़ी मांगती है, रिशाल का चेहरा जो काफ़ी गुस्से से भर चूका था |” 

     रिशाल को नहीं पता था कि यह छोटी सी मुलाकात उसकी जिंदगी को कैसे बदल देगी…

    रिशाल से टकराते ही, अमानत को लगा कि वह गुस्से में आ जाएगा। लेकिन उसने नहीं सोचा था कि रिशाल का गुस्सा इतना ज्यादा होगा।

    रिशाल ने अमानत को देखा और उसकी आँखें गुस्से से भर गईं। “तुम्हारी इतनी हिम्मत ?

    तुम्हें देखकर नहीं चलना आता है क्या?” रिशाल ने अमानत से कहा।

    अमानत ने माफी मांगी और कहा, “मुझे माफ कर दीजिए, मैं अनजाने में आपके साथ टकरा गई।”वो में अपने भाई के साथ खेल रही थी तो अनजाने में ये सब हो गया… सॉरी मे आपकी ड्रेस अभी साफ कर देती हु ये कहते हुए अमानत अपने दुपट्टे से रिशाल का ड्रेस साफ करने लगती है जहा वो साफ होने के बजाय और गन्दा ही हो जाता है, अब तो अमानत की सांस हलक मे थी उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था |” 

    इधर रिशाल का गुस्सा कम नहीं हुआ। “तुम्हें पता नहीं है कि मैं कौन हूँ?

     मैं रिशाल अग्निहोत्री हूँ, और मेरे पास बहुत इम्पोर्टेन्ट काम है। तुम्हारी इस लापरवाही से मेरा कितना समय बर्बाद हो गया पता भी है तुम्हे?”और ये क्या किया तुमने?” 

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    … to be continue…